बचपन के संघर्षों से लेकर पुनर्वास और आत्मनिर्भरता तक: NAPDDR के तहत राहुल ल्लोवांग की यात्रा
अरुणाचल प्रदेश के 27 वर्षीय राहुल ल्लोवांग ने ड्रग डिमांड रिडक्शन के लिए राष्ट्रीय कार्य योजना (NAPDDR) के तहत प्रदान की गई उपचार और पुनर्वास सहायता के माध्यम से मादक पदार्थों की लत पर काबू पाया। चारजु, खोंसा में जिला डी-एडिक्शन सेंटर में 9 मई 2024 से रियायती उपचार और परामर्श प्राप्त करने के बाद, वह अब स्व-रोजगार से जुड़े हैं और आर्थिक रूप से स्वतंत्र हैं।
सरल शब्दों में
राहुल ल्लोवांग के बचपन में पिता के साये उठने और सीमित पारिवारिक समर्थन के कारण कई कठिनाइयाँ आईं, जिससे 11 वर्ष की आयु में उन्होंने नशीले पदार्थों का सेवन शुरू कर दिया और उनकी शिक्षा मिडिल स्कूल तक ही सीमित रही। इन चुनौतियों के बावजूद, वह एक स्थिर जीवन जीना चाहते थे।
उनके जीवन में तब बदलाव आया जब उन्हें अरुणाचल प्रदेश के जिला डी-एडिक्शन सेंटर में ड्रग डिमांड रिडक्शन के लिए राष्ट्रीय कार्य योजना (NAPDDR) के तहत रियायती उपचार, परामर्श और पुनर्वास सहायता मिली। इस हस्तक्षेप ने उन्हें लत से उबरने और आत्मनिर्भर बनने में मदद की।
मुख्य बिंदु
- राहुल ल्लोवांग अरुणाचल प्रदेश के तिरप जिले के अनुसूचित जनजाति समुदाय से ताल्लुक रखने वाले 27 वर्षीय व्यक्ति हैं।
- उन्होंने कठिन पारिवारिक परिस्थितियों और सीमित समर्थन के कारण 11 वर्ष की आयु में मादक पदार्थों का उपयोग शुरू कर दिया था।
- उन्होंने ड्रग डिमांड रिडक्शन के लिए राष्ट्रीय कार्य योजना (NAPDDR) के तहत उपचार प्राप्त किया।
- यह सहायता तिरप जिले के चारजु, खोंसा में केयर मी होम वेलफेयर सोसाइटी द्वारा संचालित जिला डी-एडिक्शन सेंटर (DDAC) में दी गई।
- उन्हें 9 मई 2024 को अत्यधिक रियायती उपचार योजना, परामर्श सेवाओं और पुनर्वास सहायता सहित समर्थन प्राप्त हुआ।
- अब वह स्व-रोजगार से जुड़े हैं और अधिक वित्तीय रूप से स्वतंत्र होकर एक स्थिर जीवन की ओर बढ़ रहे हैं।
परीक्षा दृष्टिकोण
A. ड्रग डिमांड रिडक्शन के लिए राष्ट्रीय कार्य योजना (NAPDDR)
Source: Press Information Bureau