केंद्रीय गृह मंत्री और सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह तथा केंद्रीय जल शक्ति मंत्री श्री सी.आर. पाटिल की उपस्थिति में उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, राजस्थान, दिल्ली और हरियाणा के मुख्यमंत्रियों ने किशाऊ बहुउद्देशीय परियोजना समझौते पर हस्ताक्षर किए
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल की उपस्थिति में उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, राजस्थान, दिल्ली और हरियाणा के मुख्यमंत्रियों ने किशाऊ बहुउद्देशीय परियोजना समझौते पर हस्ताक्षर किए। इस परियोजना के तहत टोंस नदी पर 232.6 मीटर ऊंचा कंक्रीट ग्रेविटी बांध बनाया जाएगा जिससे जलविद्युत उत्पादन, सिंचाई और दिल्ली सहित अन्य यमुना बेसिन राज्यों को लाभ मिलेगा। यह 2018 के बाद से केंद्र सरकार के नेतृत्व में हल किया गया दसवां जल विवाद है।
यह क्यों महत्वपूर्ण है
यह समझौता अंतर-राज्यीय जल विवाद समाधान, राष्ट्रीय बुनियादी ढांचा परियोजनाओं और यमुना बेसिन संसाधन प्रबंधन से जुड़े प्रतियोगी परीक्षाओं के करंट अफेयर्स के लिए महत्वपूर्ण है।
सरल शब्दों में
उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, राजस्थान, दिल्ली और हरियाणा के मुख्यमंत्रियों ने किशाऊ बहुउद्देशीय परियोजना के समझौते पर हस्ताक्षर किए। यह कार्यक्रम केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल की उपस्थिति में हुआ।
इस परियोजना में उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश की सीमा पर बहने वाली टोंस नदी पर 232.6 मीटर ऊंचा कंक्रीट ग्रेविटी बांध बनाना शामिल है। यह 1,562 मिलियन घन मीटर पानी का भंडारण करेगा, 97,000 हेक्टेयर भूमि की सिंचाई करेगा और 1,476 मिलियन यूनिट स्वच्छ जलविद्युत उत्पन्न करेगा, जिसमें केंद्र सरकार वित्तीय भार का लगभग 90 प्रतिशत वहन करेगी।
मुख्य बिंदु
- यूपी, उत्तराखंड, एचपी, राजस्थान, दिल्ली और हरियाणा के मुख्यमंत्रियों ने किशाऊ बहुउद्देशीय परियोजना समझौते पर हस्ताक्षर किए।
- यह समझौता केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल की उपस्थिति में साइन किया गया।
- इस परियोजना में टोंस नदी पर 232.6 मीटर ऊंचा कंक्रीट ग्रेविटी बांध बनाया जाएगा।
- बांध की जल भंडारण क्षमता 1,562 मिलियन घन मीटर होगी।
- यह 97,000 हेक्टेयर भूमि की सिंचाई करेगा और 1,476 मिलियन यूनिट स्वच्छ जलविद्युत उत्पन्न करेगा।
- भारत सरकार ने इस परियोजना को राष्ट्रीय परियोजना घोषित किया है और यह लगभग 90 प्रतिशत वित्तीय भार उठाएगी।
- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में 2018 से अब तक हल किया गया यह दसवां जल विवाद बताया गया है।
- दिल्ली इस परियोजना का सबसे बड़ा लाभार्थी है, जिससे यमुना के जल प्रवाह में भी सुधार होगा।
परीक्षा दृष्टिकोण
A. टोंस नदी
Source: Press Information Bureau