प्रधान मंत्री ने सत्य, प्रिय और हितकारी वाणी के महत्व को रेखांकित करते हुए एक संस्कृत सुभाषित साझा किया
प्रधान मंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने सत्य, प्रिय और हितकारी वाणी के महत्व को रेखांकित करने के लिए एक्स पर एक संस्कृत सुभाषित साझा किया। उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि अनुशासित और विचारशील वाणी समाज में शांति, सद्भाव और सकारात्मकता को बढ़ावा देने में मदद करती है।
सरल शब्दों में
प्रधान मंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने वाणी के महत्व पर केंद्रित एक संस्कृत सुभाषित साझा किया। उन्होंने उल्लेख किया कि लोगों को हमेशा ऐसी बातें बोलनी चाहिए जो किसी के मन में अशांति पैदा किए बिना सत्य, प्रिय और हितकारी हों।
उन्होंने आगे स्पष्ट किया कि पवित्र ज्ञान का निरंतर अध्ययन और चिंतन वाणी को उन्नत करता है। विचारपूर्वक व्यक्त किए गए शब्द पूरे समाज में शांति, सद्भाव और सकारात्मकता फैलाने में मदद करते हैं।
मुख्य बिंदु
- प्रधान मंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने एक संस्कृत सुभाषित साझा किया।
- साझा किया गया सुभाषित सत्य, प्रिय और हितकारी वाणी पर जोर देता है।
- प्रधान मंत्री ने समाज में शांति और सद्भाव को बढ़ावा देने के लिए वाणी में अनुशासन के महत्व को रेखांकित किया।
- उद्धृत श्लोक है: अनुद्वेगकरं वाक्यं सत्यं प्रियहितं च यत्। स्वाध्यायाभ्यसनं चैव वाङ्मयं तप उच्यते॥
- यह संदेश प्रधान मंत्री द्वारा एक्स पर साझा किया गया था।
- पोस्ट की तारीख 24 सितंबर 2026 है।
परीक्षा दृष्टिकोण
𝕏 Official Update
A. एक संस्कृत सुभाषित
Source: Press Information Bureau