केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने नई दिल्ली में एनआईडीएम की संचालक मंडल की तीसरी बैठक की अध्यक्षता की
केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने नई दिल्ली में राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन संस्थान (एनआईडीएम) के संचालक मंडल की तीसरी बैठक की अध्यक्षता की। उन्होंने कहा कि भारत ने राहत-केंद्रित दृष्टिकोण से आगे बढ़कर जोखिम कम करने, शुरुआती चेतावनी प्रणालियों और 'शून्य क्षति' के तीन स्तंभों पर आधारित एक नए युग में प्रवेश किया है। उन्होंने बढ़े हुए वित्तीय आवंटन, संस्थागत सुधारों और आपदा प्रबंधन के लिए 'समग्र सरकार' के दृष्टिकोण को अपनाने पर भी प्रकाश डाला।
यह क्यों महत्वपूर्ण है
यूपीएससी, एसएससी और राज्य-पीएससी परीक्षाओं के लिए करेंट अफेयर्स, आपदा प्रबंधन और सरकारी शासन संरचनाओं के अंतर्गत महत्वपूर्ण।
सरल शब्दों में
केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह ने नई दिल्ली में राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन संस्थान (एनआईडीएम) के संचालक मंडल की तीसरी बैठक की अध्यक्षता की, जिसमें विभिन्न वरिष्ठ अधिकारी और एजेंसियां शामिल हुईं।
उन्होंने बताया कि भारत का आपदा प्रबंधन केवल राहत और पुनर्वास से बदलकर जोखिम न्यूनीकरण, शुरुआती चेतावनियों और 'शून्य क्षति' की ओर बढ़ गया है।
मुख्य बिंदु
- केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह ने नई दिल्ली में एनआईडीएम के संचालक मंडल की तीसरी बैठक की अध्यक्षता की।
- भारत का आपदा प्रबंधन दृष्टिकोण अब जोखिम न्यूनीकरण, शुरुआती चेतावनी प्रणालियों और 'शून्य क्षति' पर आधारित है।
- आपदा प्रबंधन राष्ट्रीय केंद्र को 2003 में तत्कालीन प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेयी द्वारा नया जीवन दिया गया और गृह मंत्रालय के अधीन लाया गया।
- एसडीआरएफ का आवंटन लगभग चार गुना और एनडीआरएफ का आवंटन लगभग तीन गुना बढ़ गया है।
- पिछले 11 वर्षों में इस क्षेत्र में लगभग ₹2.5 लाख करोड़ खर्च किए गए हैं।
- आपदा प्रबंधन अधिनियम में 20 साल बाद संशोधन किया गया, जिसमें शहरी आपदा प्रबंधन प्राधिकरणों की शुरुआत की गई।
- 16वें वित्त आयोग ने इस अवधि के लिए ₹2 lakh crore का प्रावधान किया है।
- एनआईडीएम संस्थान के लिए हाल ही में चार एकड़ जमीन आवंटित की गई है।
परीक्षा दृष्टिकोण
A. केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह
Source: Press Information Bureau