नई दिल्ली में “विकसित भारत की ओर भारत की यात्रा के लिए वित्तपोषण” पर सम्मेलन संपन्न हुआ
केंद्रीय और राज्य के वित्त मंत्रियों, सचिवों और विशेषज्ञों को एक साथ लाते हुए विकास के मार्ग पर विचार-विमर्श करने के लिए नई दिल्ली में “विकसित भारत की ओर भारत की यात्रा के लिए वित्तपोषण” शीर्षक से दो दिवसीय सम्मेलन संपन्न हुआ। चर्चाएं बचत को बढ़ावा देने, कृषि परिवर्तन, ऊर्जा संक्रमण और सार्वजनिक वित्त के साथ-साथ निजी पूंजी का लाभ उठाने पर केंद्रित थीं।
यह क्यों महत्वपूर्ण है
भारतीय अर्थव्यवस्था, राजकोषीय संघवाद, सरकारी नीतियों और विकसित भारत जैसे राष्ट्रीय विकास ढांचों से जुड़ी प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए महत्वपूर्ण।
सरल शब्दों में
नई दिल्ली में आयोजित दो दिवसीय सम्मेलन में केंद्रीय और राज्य के नेताओं, बैंकिंग विशेषज्ञों और नीति निर्माताओं ने एक विकसित राष्ट्र बनने की दिशा में भारत के विकास के वित्तपोषण पर चर्चा की। मुख्य विषयों में घरेलू बचत बढ़ाना, निजी क्षेत्र के निवेश का लाभ उठाना और राज्यों में संसाधन जुटाना शामिल था।
विशिष्ट वक्ताओं ने वित्तीय अनुशासन बनाए रखते हुए कृषि वित्तपोषण और नवीकरणीय ऊर्जा संक्रमण को बढ़ाने पर जोर दिया। अधिकारियों ने सहमति व्यक्त की कि विकसित भारत को प्राप्त करने के लिए केंद्र और राज्यों के बीच मजबूत सहयोग के साथ-साथ सुदृढ़ परियोजना योजना और निजी पूंजी की भागीदारी की आवश्यकता है।
मुख्य बिंदु
- इस सम्मेलन का शीर्षक “विकसित भारत की ओर भारत की यात्रा के लिए वित्तपोषण” था और यह नई दिल्ली में संपन्न हुआ।
- इसमें केंद्रीय वित्त और कॉर्पोरेट मामलों के मंत्री के साथ-साथ विभिन्न मुख्यमंत्रियों, उप-मुख्यमंत्री और राज्य के वित्त मंत्रियों ने भाग लिया।
- आर्थिक मामलों के विभाग की सचिव श्रीमती अनुराग ठाकुर ने पिछले 16-17 महीनों में भारत के लिए चार सॉवरेन रेटिंग उन्नयन का उल्लेख किया, जिसमें जेसीआर द्वारा बीबीबी+ से ए- में उन्नयन शामिल है।
- श्री एन.के. सिंह ने इस बात पर प्रकाश डाला कि भारत की सकल घरेलू बचत दर को सकल घरेलू उत्पाद के लगभग 34 प्रतिशत से बढ़ाकर 38-40 प्रतिशत करने की आवश्यकता है।
- विषयगत सत्रों में व्यापक आर्थिक अवलोकन, कृषि क्षेत्र परिवर्तन का वित्तपोषण और ऊर्जा संक्रमण का वित्तपोषण शामिल थे।
- मुख्य आर्थिक सलाहकार डॉ. वी. अनंत नागेश्वरन ने 2031-32 तक राज्य के पूंजीगत परिव्यय को सकल राज्य घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) के लगभग 2.4 प्रतिशत से बढ़ाकर 3 प्रतिशत करने का सुझाव दिया।
- राज्यों की भागीदारी वाले कार्य समूह विषयगत विचार-विमर्श और क्षेत्रवार सिफारिशों को आगे बढ़ाएंगे।
- सम्मेलन में जीएसडीपी मापने और नई तकनीक की भूमिका पर विशेष प्रस्तुतियां दी गईं।
परीक्षा दृष्टिकोण
𝕏 Official Update
A. सकल घरेलू उत्पाद का लगभग 34 प्रतिशत
Source: Press Information Bureau