ऐतिहासिक पृष्ठभूमि: कंपनी का शासन (1773–1858)
रेग्युलेटिंग एक्ट 1773 से भारत सरकार अधिनियम 1858 तक ब्रिटिश प्रशासनिक तंत्र का विकास। केंद्रीकरण, द्वैध शासन प्रणाली और संवैधानिक आधार।
1. प्रस्तावना: व्यापार से शासन तक
ब्रिटिश भारत में 1600 ई. में ईस्ट इंडिया कंपनी (EIC) के रूप में महारानी एलिजाबेथ प्रथम के चार्टर द्वारा व्यापार के अनन्य अधिकारों के साथ आए थे।
बक्सर के युद्ध (1764) के बाद, कंपनी ने 1765 में मुगल सम्राट शाह आलम द्वितीय से बंगाल, बिहार और ओडिशा के दीवानी अधिकार (राजस्व एवं नागरिक न्याय) प्राप्त किए। यहीं से कंपनी का एक विशुद्ध व्यापारिक संस्था से क्षेत्रीय संप्रभु शक्ति में रूपांतरण आरंभ हुआ।
ब्रिटिश भारत का संवैधानिक इतिहास मुख्य रूप से दो चरणों में विभाजित है:
- कंपनी का शासन (1773–1858)
- क्राउन का शासन (1858–1947)
ब्रिटिश शासन के दो कालखंड: कंपनी शासन बनाम क्राउन शासन
कंपनी का शासन (Company Rule)
1773 – 1858
ब्रिटिश संसद द्वारा ईस्ट इंडिया कंपनी के व्यापारिक एवं प्रशासनिक कार्यों का नियमन।
बंगाल के गवर्नर को गवर्नर-जनरल बनाया (वारेन हेस्टिंग्स); कलकत्ता में सुप्रीम कोर्ट (1774)।
कोर्ट ऑफ डायरेक्टर्स (व्यापार) + बोर्ड ऑफ कंट्रोल (राजनीतिक व सैन्य मामले)।
चाय व चीन व्यापार छोड़कर एकाधिकार समाप्त; शिक्षा हेतु ₹1 लाख सालाना बजट।
भारत का गवर्नर-जनरल (बेंटिंक); विधि सदस्य (मैकाले); कंपनी केवल प्रशासनिक निकाय बनी।
विधायी व कार्यकारी कार्य अलग; सिविल सेवा में खुली प्रतियोगिता प्रणाली।
1857 का विद्रोह
कंपनी शासन का पतन; सत्ता ब्रिटिश क्राउन को स्थानांतरित
क्राउन का शासन (Crown Rule)
1858 – 1947
ब्रिटिश महारानी (क्राउन) एवं ब्रिटिश कैबिनेट द्वारा भारत का प्रत्यक्ष शासन।
कंपनी खत्म; गवर्नर-जनरल बने वायसराय (कैनिंग); भारत सचिव का नया पद।
पोर्टफोलियो प्रणाली (1861), बजट पर बहस (1892), पृथक निर्वाचन (मार्ले-मिंटो 1909)।
प्रांतों में आरक्षित एवं हस्तांतरित विषय (Dyarchy); केंद्र में द्विसदनीय व्यवस्था।
अखिल भारतीय संघ का प्रस्ताव; प्रांतीय स्वायत्तता; संघीय न्यायालय (Federal Court 1937)।
भारत और पाकिस्तान दो संप्रभु डोमिनियन बने; ब्रिटिश संप्रभुता का पूर्ण अंत।
2. 1773 का रेगुलेटिंग एक्ट
भारत में ईस्ट इंडिया कंपनी के कार्यों को नियंत्रित और विनियमित करने के लिए ब्रिटिश संसद द्वारा उठाया गया यह पहला प्रमुख कदम था।
मुख्य प्रावधान:
- गवर्नर जनरल का पदनाम: बंगाल के गवर्नर को 'बंगाल का गवर्नर-जनरल' नामित किया गया तथा उनकी सहायता के लिए 4 सदस्यीय कार्यकारी परिषद गठित की गई। लॉर्ड वारेन हेस्टिंग्स बंगाल के पहले गवर्नर-जनरल बने।
- प्रेसिडेंसियों की अधीनता: बॉम्बे और मद्रास के गवर्नर बंगाल के गवर्नर-जनरल के अधीन कर दिए गए।
- कलकत्ता में सर्वोच्च न्यायालय: 1774 में कलकत्ता में एक सर्वोच्च न्यायालय की स्थापना की गई, जिसमें एक मुख्य न्यायाधीश (सर एलिजा इम्पे) और तीन अन्य न्यायाधीश शामिल थे।
- निजी व्यापार पर प्रतिबंध: कंपनी के कर्मचारियों को निजी व्यापार करने या भारतीयों से उपहार/रिश्वत लेने पर पूर्ण रोक लगा दी गई।
- कोर्ट ऑफ डायरेक्टर्स: ब्रिटिश सरकार का कंपनी पर नियंत्रण सशक्त हुआ क्योंकि कंपनी के बोर्ड को भारत के नागरिक, सैन्य और राजस्व मामलों की रिपोर्ट देना अनिवार्य किया गया।
परीक्षार्थियों की आम गलती:
- बंगाल का प्रथम गवर्नर-जनरल: लॉर्ड वारेन हेस्टिंग्स (1773 का रेगुलेटिंग एक्ट)
- भारत का प्रथम गवर्नर-जनरल: लॉर्ड विलियम बेंटिंक (1833 का चार्टर एक्ट)
- भारत का प्रथम वायसराय: लॉर्ड कैनिंग (1858 का भारत सरकार अधिनियम) परीक्षा में प्रश्न को ध्यान से पढ़ें कि "बंगाल" पूछा गया है या "भारत"!
अधिकार क्षेत्र का टकराव: जब राजा नंद कुमार ने वारेन हेस्टिंग्स पर रिश्वतखोरी के आरोप लगाए, तो हेस्टिंग्स और मुख्य न्यायाधीश एलिजा इम्पे ने अंग्रेजी जालसाजी कानून के तहत नंद कुमार पर मुकदमा चलाकर उन्हें फांसी की सजा दिलवा दी। संवैधानिक प्रभाव: इस घटना से ब्रिटिश संसद में भारी रोष उत्पन्न हुआ, जिसके परिणामस्वरूप 1781 का संशोधन अधिनियम (एक्ट ऑफ सेटलमेंट) पारित हुआ, जिसने गवर्नर-जनरल और उनकी परिषद को उनके आधिकारिक कार्यों के लिए सर्वोच्च न्यायालय के क्षेत्राधिकार से मुक्त कर दिया।
वारेन हेस्टिंग्स — बंगाल के पहले गवर्नर-जनरल (1773–1785)
1773 के रेगुलेटिंग एक्ट द्वारा यह पद सृजित हुआ और 1774 में कलकत्ता में सर्वोच्च न्यायालय की स्थापना हुई।
3. 1784 का पिट्स इंडिया एक्ट
ब्रिटिश प्रधानमंत्री विलियम पिट (यंगर) द्वारा 1773 के एक्ट की कमियों को दूर करने के लिए पेश किया गया।
मुख्य प्रावधान:
- द्वैध शासन (Double Government):
- कोर्ट ऑफ डायरेक्टर्स: व्यापारिक मामलों का प्रबंधन।
- बोर्ड ऑफ कंट्रोल (6 सदस्य): राजनीतिक, नागरिक, सैन्य और राजस्व मामलों के नियंत्रण हेतु नई संस्था।
- ब्रिटिश आधिपत्य का क्षेत्र: भारत में कंपनी के अधीन क्षेत्र को पहली बार 'भारत में ब्रिटिश आधिपत्य का क्षेत्र' कहा गया।
1784 का पिट्स इंडिया एक्ट: द्वैध शासन प्रणाली (Double Government)
ब्रिटिश क्राउन एवं संसद (लंदन)
भारत में कंपनी के अधीन क्षेत्रों पर सर्वोच्च संवैधानिक व कानूनी नियंत्रण
कोर्ट ऑफ डायरेक्टर्स (Court of Directors)
ईस्ट इंडिया कंपनी का संचालक मंडल (24 निदेशक)
- कंपनी के व्यापारिक व वाणिज्यिक कार्यों का प्रबंधन।
- कंपनी के शेयरधारकों (Court of Proprietors) के प्रति जवाबदेह।
- राजनीतिक मामलों में हस्तक्षेप का अधिकार नहीं।
बोर्ड ऑफ कंट्रोल (Board of Control)
ब्रिटिश संसद द्वारा नियुक्त 6 कमिश्नर
- सभी नागरिक, सैन्य और राजस्व मामलों का प्रत्यक्ष निरीक्षण।
- ब्रिटिश कैबिनेट मंत्री (राज्य सचिव/चांसलर) इसके अध्यक्ष।
- कंपनी के गुप्त निर्देश भेजने का विशेषाधिकार।
गवर्नर-जनरल व उनकी परिषद (कलकत्ता)
लंदन से आने वाले दोनों प्रकार के आदेशों (व्यापारिक + राजनीतिक) का भारत की धरती पर क्रियान्वयन करने वाला सर्वोच्च प्रशासनिक निकाय।
4. 1813 का चार्टर एक्ट
- व्यापारिक एकाधिकार की समाप्ति: कंपनी का भारतीय व्यापार का एकाधिकार समाप्त कर दिया गया।
- अपवाद: चाय के व्यापार और चीन के साथ व्यापार में कंपनी का एकाधिकार सुरक्षित रहा।
- शिक्षा हेतु एक लाख रुपये: भारत में शिक्षा और विज्ञान के प्रोत्साहन के लिए प्रतिवर्ष 1 लाख रुपये व्यय करने का प्रावधान।
- ईसाई मिशनरियों का प्रवेश: भारत में धर्म प्रचार की अनुमति दी गई।
5. 1833 का चार्टर एक्ट: केंद्रीकरण का अंतिम चरण
- भारत का गवर्नर-जनरल: बंगाल के गवर्नर-जनरल को 'भारत का गवर्नर-जनरल' बनाया गया। लॉर्ड विलियम बेंटिंक भारत के प्रथम गवर्नर-जनरल बने।
- व्यापारिक एकाधिकार का पूर्ण अंत: चाय और चीन व्यापार सहित कंपनी के सभी व्यापारिक अधिकार समाप्त हो गए; कंपनी विशुद्ध प्रशासनिक संस्था बन गई।
- विधि सदस्य: गवर्नर-जनरल की परिषद में चौथे सदस्य के रूप में विधि सदस्य (लॉर्ड मैकाले) को शामिल किया गया। प्रथम विधि आयोग गठित हुआ।
6. 1853 का चार्टर एक्ट
- शक्तियों का पृथक्करण: गवर्नर-जनरल की परिषद के विधायी एवं कार्यकारी कार्यों को पहली बार पृथक किया गया।
- भारतीय केंद्रीय विधान परिषद: 6 सदस्यीय विधान परिषद की स्थापना हुई जिसे 'मिनी संसद' के रूप में देखा गया।
- सिविल सेवा में खुली प्रतियोगिता: सिविल सेवकों की भर्ती हेतु खुली प्रतियोगिता प्रणाली का आरंभ। 1854 में मैकाले समिति की नियुक्ति हुई।
7. 1858 का भारत सरकार अधिनियम: क्राउन का प्रत्यक्ष शासन
1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के बाद पारित हुआ। इसे 'भारत के अच्छे शासन के लिए अधिनियम' कहा गया।
- ईस्ट इंडिया कंपनी की समाप्ति: शासन सीधे ब्रिटिश महारानी (क्राउन) के हाथों में चला गया।
- वायसराय का पद: गवर्नर-जनरल को वायसराय कहा गया। लॉर्ड कैनिंग पहले वायसराय बने।
- द्वैध शासन का अंत: बोर्ड ऑफ कंट्रोल और कोर्ट ऑफ डायरेक्टर्स दोनों समाप्त कर दिए गए।
- भारत का राज्य सचिव (Secretary of State): ब्रिटिश कैबिनेट के एक सदस्य को राज्य सचिव नियुक्त किया गया, जिनकी सहायता हेतु 15 सदस्यीय 'काउंसिल ऑफ इंडिया' बनाई गई।
इलाहाबाद दरबार (1 नवम्बर 1858) — महारानी विक्टोरिया का घोषणापत्र
लॉर्ड कैनिंग ने महारानी विक्टोरिया का घोषणापत्र पढ़ा, जिसके तहत ईस्ट इंडिया कंपनी का शासन समाप्त होकर सीधा ब्रिटिश क्राउन के अधीन आ गया।
भारत के सर्वोच्च प्रशासनिक पद का विकास (1757–1858)
बंगाल का गवर्नर (Governor of Bengal)
1757 – 1773बंगाल का गवर्नर-जनरल (Governor-General of Bengal)
1773 – 1833भारत का गवर्नर-जनरल (Governor-General of India)
1833 – 1858भारत का वायसराय एवं गवर्नर-जनरल
👑8. मास्टर तुलना तालिका: प्रमुख संवैधानिक अधिनियम (1773–1858)
| अधिनियम | प्रमुख संवैधानिक नवाचार | प्रशासनिक प्रमुख | ईस्ट इंडिया कंपनी की व्यापारिक स्थिति |
|---|---|---|---|
| 1773 का रेगुलेटिंग एक्ट | कलकत्ता में सुप्रीम कोर्ट (1774); 4 सदस्यीय कार्यकारी परिषद | बंगाल का गवर्नर-जनरल (वारेन हेस्टिंग्स) | कर्मचारियों के निजी व्यापार पर प्रतिबंध |
| 1784 का पिट्स इंडिया एक्ट | द्वैध शासन प्रणाली (बोर्ड ऑफ कंट्रोल + कोर्ट ऑफ डायरेक्टर्स) | गवर्नर-जनरल व उनकी परिषद | व्यापारिक और राजनीतिक कार्यों का पृथक्करण |
| 1813 का चार्टर एक्ट | भारतीय शिक्षा हेतु ₹1 लाख; ईसाई मिशनरियों को अनुमति | बंगाल का गवर्नर-जनरल | चाय व चीन व्यापार छोड़ बाकी एकाधिकार खत्म |
| 1833 का चार्टर एक्ट | पूर्ण केंद्रीकरण; विधि सदस्य शामिल (लॉर्ड मैकाले) | भारत का गवर्नर-जनरल (विलियम बेंटिंक) | व्यापारिक एकाधिकार पूर्णतः समाप्त |
| 1853 का चार्टर एक्ट | पृथक केंद्रीय विधान परिषद; सिविल सेवा खुली प्रतियोगिता | भारत का गवर्नर-जनरल | संसद के निर्णय तक केवल प्रशासनिक निकाय |
| 1858 का भारत सरकार अधिनियम | क्राउन का प्रत्यक्ष शासन; भारत सचिव + 15 सदस्यीय परिषद | भारत का वायसराय (लॉर्ड कैनिंग) | ईस्ट इंडिया कंपनी पूर्णतः समाप्त (विघटित) |
पिछले वर्षों के प्रश्न (PYQs) अभ्यास
UPSC, SSC एवं राज्य PSC परीक्षाओं में पूछे गए वास्तविक प्रश्न
निम्नलिखित में से किस अधिनियम के तहत "बोर्ड ऑफ कंट्रोल" की स्थापना की गई, जिसके द्वारा ब्रिटिश भारत में द्वैध शासन प्रणाली शुरू हुई?
1784 के पिट्स इंडिया एक्ट ने राजनीतिक, नागरिक और सैन्य मामलों के नियंत्रण हेतु बोर्ड ऑफ कंट्रोल की स्थापना की, जबकि कोर्ट ऑफ डायरेक्टर्स व्यापारिक मामले देखता था। इसी को द्वैध शासन कहा गया।
1833 के चार्टर एक्ट द्वारा भारत के पहले गवर्नर-जनरल के रूप में किसे नियुक्त किया गया था?
1833 के चार्टर एक्ट ने बंगाल के गवर्नर-जनरल को "भारत का गवर्नर-जनरल" बना दिया। लॉर्ड विलियम बेंटिंक भारत के प्रथम गवर्नर-जनरल बने।
किस चार्टर अधिनियम द्वारा ईस्ट इंडिया कंपनी का व्यापारिक एकाधिकार (चाय और चीन के व्यापार सहित) पूरी तरह समाप्त कर दिया गया?
1813 के चार्टर एक्ट ने चाय और चीन के व्यापार को छोड़कर बाकी एकाधिकार समाप्त किया था, लेकिन 1833 के चार्टर एक्ट ने चाय व चीन सहित समस्त व्यापारिक एकाधिकार पूर्णतः समाप्त कर दिए।
कलकत्ता में सर्वोच्च न्यायालय की स्थापना किस अधिनियम के तहत की गई थी, जिसके पहले मुख्य न्यायाधीश सर एलिजा इम्पे थे?
1773 के रेगुलेटिंग एक्ट के प्रावधानों के अंतर्गत 1774 में कलकत्ता में सर्वोच्च न्यायालय स्थापित हुआ, जिसके प्रथम मुख्य न्यायाधीश सर एलिजा इम्पे थे।
भारतीय सिविल सेवा में भर्ती के लिए खुली प्रतियोगी परीक्षा प्रणाली सर्वप्रथम किस अधिनियम द्वारा शुरू की गई थी?
1853 के चार्टर एक्ट द्वारा सिविल सेवकों की भर्ती हेतु खुली प्रतियोगिता प्रणाली शुरू की गई। इसके अनुपालन में 1854 में मैकाले समिति गठित हुई।