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संविधान का निर्माण

संविधान सभा का गठन, कैबिनेट मिशन योजना 1946, प्रारूप समिति, उद्देश्य प्रस्ताव और संविधान को अंगीकृत करने के प्रमुख चरण।

1. संविधान सभा की मांग एवं ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

स्वतंत्र भारत के लिए संविधान निर्माण हेतु एक प्रतिनिधि सभा की मांग राष्ट्रीय स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान उत्तरोत्तर प्रबल हुई:

  • 1934: भारत के लिए संविधान सभा का विचार सर्वप्रथम एम.एन. रॉय (भारत में वामपंथी आंदोलन के प्रणेता) द्वारा प्रस्तुत किया गया।
  • 1935: भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (INC) ने आधिकारिक रूप से पहली बार संविधान निर्माण हेतु संविधान सभा के गठन की मांग की।
  • 1938: कांग्रेस की ओर से जवाहरलाल नेहरू ने घोषणा की: "स्वतंत्र भारत का संविधान बिना किसी बाहरी हस्तक्षेप के वयस्क मताधिकार पर निर्वाचित संविधान सभा द्वारा बनाया जाएगा।"
  • 1940 (अगस्त प्रस्ताव): ब्रिटिश सरकार ने वायसराय लिनलिथगो के 'अगस्त प्रस्ताव' में भारतीयों द्वारा संविधान बनाने की मांग को सैद्धांतिक रूप से पहली बार स्वीकार किया।
  • 1942 (क्रिप्स मिशन): सर स्टेफोर्ड क्रिप्स द्वितीय विश्व युद्ध के बाद एक निर्वाचित संविधान सभा का प्रारूप प्रस्ताव लेकर आए। मुस्लिम लीग ने इसे खारिज कर दिया, क्योंकि वह दो पृथक संविधान सभाओं की मांग कर रही थी।
  • 1946 (कैबिनेट मिशन): 3 सदस्यीय ब्रिटिश कैबिनेट शिष्टमंडल (लॉर्ड पैथिक लॉरेंस, सर स्टेफोर्ड क्रिप्स, एवं ए.वी. अलेक्जेंडर) भारत आया। इसने दो पृथक सभाओं की मांग अस्वीकार करते हुए एकल संविधान सभा की योजना प्रस्तुत की, जिसे सभी दलों ने स्वीकार किया।
🧭 कालक्रम यात्रा

संविधान निर्माण के ऐतिहासिक पड़ाव (1934–1950)

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1934

एम.एन. रॉय का विचार

भारत के लिए संविधान सभा का विचार सर्वप्रथम एम.एन. रॉय द्वारा प्रस्तुत किया गया।

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1940

अगस्त प्रस्ताव

ब्रिटिश सरकार ने भारतीयों द्वारा संविधान निर्माण की मांग को सैद्धांतिक रूप से स्वीकारा।

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May 1946

कैबिनेट मिशन योजना

3 सदस्यीय मिशन (लॉरेंस, क्रिप्स, अलेक्जेंडर) की सिफारिश पर संविधान सभा का गठन।

➔
9 Dec 1946

प्रथम ऐतिहासिक बैठक

डॉ. सच्चिदानंद सिन्हा अस्थायी अध्यक्ष। 11 Dec को डॉ. राजेन्द्र प्रसाद स्थायी अध्यक्ष बने।

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13 Dec 1946

उद्देश्य प्रस्ताव

पंडित नेहरू द्वारा प्रस्तुत (22 Jan 1947 को सर्वसम्मति से पारित); यही प्रस्तावना का आधार बना।

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29 Aug 1947

प्रारूप समिति का गठन

डॉ. बी.आर. अम्बेडकर की अध्यक्षता में 7 सदस्यीय प्रारूप समिति का गठन।

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26 Nov 1949

संविधान अंगीकृत (Adoption)

संविधान सभा द्वारा संविधान पारित व अंगीकृत किया गया। इसे "संविधान दिवस" के रूप में मनाते हैं।

➔
26 Jan 1950

संविधान लागू (Commenced)

भारत पूर्ण गणतंत्र बना। 1930 के पूर्ण स्वराज्य दिवस की स्मृति में यह दिन चुना गया।

⏱️ कुल समय: 2 वर्ष, 11 माह, 18 दिन 📅 सत्र: 11 सत्र (165 दिन बैठक) 💰 कुल व्यय: ~₹64 लाख
1934 ➔ 1950

2. संविधान सभा की संरचना एवं सीट आवंटन

कैबिनेट मिशन योजना (मई 1946) के अनुसार:

  1. कुल सदस्य संख्या: कुल 389 सीटें निर्धारित की गईं:
    • 296 सीटें ब्रिटिश भारत को आवंटित (292 सीटें 11 गवर्नर्स प्रांतों से + 4 सीटें मुख्य आयुक्त प्रांतों: दिल्ली, अजमेर-मेरवाड़ा, कुर्ग और ब्रिटिश बलूचिस्तान से)।
    • 93 सीटें देसी रियासतों को आवंटित।
  2. जनसंख्या के अनुपात में सीटें: प्रत्येक प्रांत एवं रियासत को उनकी जनसंख्या के अनुपात में सीटें दी गईं (मोटे तौर पर प्रति 10 लाख जनसंख्या पर एक सीट)।
  3. सांप्रदायिक आधार पर वर्गीकरण: ब्रिटिश प्रांतों की सीटों को तीन प्रमुख समुदायों—मुस्लिम, सिख, और सामान्य (मुस्लिम व सिख को छोड़कर अन्य सभी)—में उनकी आबादी के अनुपात में बांटा गया।
  4. निर्वाचन पद्धति:
    • ब्रिटिश प्रांतों के प्रतिनिधि प्रांतीय विधानसभाओं द्वारा एकल संक्रमणीय मत के माध्यम से आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली द्वारा अप्रत्यक्ष रूप से निर्वाचित हुए।
    • देसी रियासतों के प्रतिनिधि उनके शासकों/राजाओं द्वारा मनोनीत किए जाने थे।
💡 बार-बार होने वाली गलतियाँ (Exam Trap) — संविधान सभा का स्वरूप (बार-बार पूछा जाने वाला प्रश्न)

परीक्षा में ध्यान रखने योग्य महत्वपूर्ण बिंदु:

  • संविधान सभा का चुनाव वयस्क मताधिकार द्वारा प्रत्यक्ष रूप से नहीं हुआ था (प्रांतीय विधानसभाएं स्वयं 1935 के अधिनियम के तहत सीमित मताधिकार से चुनी गई थीं)।
  • यह "अंशतः निर्वाचित और अंशतः मनोनीत" निकाय थी।
  • अप्रत्यक्ष चुनाव के बावजूद इसमें भारतीय समाज के सभी वर्गों (हिंदू, मुस्लिम, सिख, पारसी, एंग्लो-इंडियन, भारतीय ईसाई, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति तथा महिलाएं) का प्रतिनिधित्व था।
  • महात्मा गांधी और मोहम्मद अली जिन्ना संविधान सभा के सदस्य नहीं थे।
🏛️ संरचना चार्ट

संविधान सभा की संरचना: कैबिनेट मिशन योजना (1946)

कैबिनेट मिशन योजना (मई 1946)
389 कुल सीटें

प्रत्येक सीट लगभग 10 लाख जनसंख्या पर आवंटित

ब्रिटिश भारत (अप्रत्यक्ष निर्वाचित) 296 सीटें

प्रांतीय विधानसभाओं द्वारा एकल संक्रमणीय मत से आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली द्वारा निर्वाचित।

11 गवर्नर्स प्रांत

मद्रास, बंबई, संयुक्त प्रांत, बिहार, आदि

292
4 मुख्य आयुक्त प्रांत

दिल्ली, अजमेर-मेरवाड़ा, कुर्ग, ब्रिटिश बलूचिस्तान

4
देसी रियासतें (मनोनीत) 93 सीटें

रियासतों के प्रमुखों (राजाओं/नवाबों) द्वारा मनोनीत किए जाने थे (कोई चुनाव नहीं)।

⚠️
प्रारंभ में अधिकांश रियासतें संविधान सभा से अलग रहीं। हैदराबाद रियासत ने संविधान सभा में कभी भाग नहीं लिया।
✂️ 3 जून 1947 विभाजन योजना उपरांत

पुनर्गठित संविधान सभा: 389 से घटकर 299 सीटें

मुस्लिम लीग के हटने के बाद भारतीय प्रांतों की 229 सीटें और देसी रियासतों की 70 सीटें बचीं।

299
💡 परीक्षा तथ्य: संविधान सभा "अंशतः निर्वाचित और अंशतः मनोनीत" निकाय थी।
389 → 299

3. संविधान सभा की कार्यप्रणाली

संविधान सभा की ऐतिहासिक प्रथम बैठक संविधान कक्ष (वर्तमान संसद भवन का सेंट्रल हॉल, नई दिल्ली) में संपन्न हुई:

  • प्रथम बैठक (9 दिसंबर 1946): कुल 211 सदस्यों ने भाग लिया (मुस्लिम लीग ने बहिष्कार किया)। फ्रांसीसी परंपरा का पालन करते हुए सबसे वरिष्ठ सदस्य डॉ. सच्चिदानंद सिन्हा को अस्थायी अध्यक्ष चुना गया।
  • स्थायी पदाधिकारी (11 दिसंबर 1946):
    • स्थायी अध्यक्ष: डॉ. राजेन्द्र प्रसाद को निर्विरोध अध्यक्ष चुना गया।
    • उपाध्यक्ष: सभा के दो उपाध्यक्ष चुने गए: एच.सी. मुखर्जी और वी.टी. कृष्णामाचारी।
    • संवैधानिक सलाहकार: सर बेनेगल नरसिंह राव (बी.एन. राव) को सभा का विधिक/संवैधानिक सलाहकार नियुक्त किया गया।
  • उद्देश्य प्रस्ताव (13 दिसंबर 1946):
    • जवाहरलाल नेहरू द्वारा ऐतिहासिक 'उद्देश्य प्रस्ताव' (Objectives Resolution) पेश किया गया, जिसने संविधान के दार्शनिक आधार और मूल्यों को तय किया।
    • इसे 22 जनवरी 1947 को सर्वसम्मति से स्वीकार किया गया।
    • यही उद्देश्य प्रस्ताव आगे चलकर भारतीय संविधान की प्रस्तावना (Preamble) का आधार बना।

4. संविधान सभा की महत्वपूर्ण समितियां

संविधान निर्माण के विविध कार्यों के संचालन हेतु 22 समितियां (8 बड़ी समितियां तथा कई छोटी समितियां) गठित की गईं:

प्रमुख समितियां एवं उनके अध्यक्ष:

  • प्रारूप समिति (Drafting Committee): डॉ. बी.आर. अम्बेडकर
  • संघ शक्ति समिति: जवाहरलाल नेहरू
  • संघीय संविधान समिति: जवाहरलाल नेहरू
  • प्रांतीय संविधान समिति: सरदार वल्लभभाई पटेल
  • मौलिक अधिकारों एवं अल्पसंख्यकों संबंधी परामर्श समिति: सरदार वल्लभभाई पटेल
  • प्रक्रिया नियम समिति: डॉ. राजेन्द्र प्रसाद
  • संचालन समिति (Steering Committee): डॉ. राजेन्द्र प्रसाद
  • राज्यों के लिए समिति (राज्यों से समझौता करने वाली): जवाहरलाल नेहरू

प्रारूप समिति (29 अगस्त 1947):

सभी समितियों में सबसे महत्वपूर्ण प्रारूप समिति थी, जिसे सर बी.एन. राव द्वारा तैयार किए गए मूल संविधान के प्रारूप पर विचार कर नया प्रारूप तैयार करने का दायित्व सौंपा गया।

इसमें डॉ. बी.आर. अम्बेडकर की अध्यक्षता में कुल 7 सदस्य थे।

⚖️ समिति ढांचा

प्रारूप समिति का संगठनात्मक ढांचा (29 अगस्त 1947)

अध्यक्ष (CHAIRMAN) संविधान के जनक

डॉ. भीमराव रामजी अम्बेडकर

भारत के प्रथम विधि मंत्री। इन्हें "आधुनिक मनु" एवं "भारतीय संविधान का मुख्य शिल्पकार" कहा जाता है।

संवैधानिक सलाहकार
सर बी.एन. राव

इन्होंने संविधान का मूल प्रारंभिक प्रारूप (Initial Draft) तैयार किया था।

💡 नोट: ये प्रारूप समिति के सदस्य नहीं थे
प्रारूप समिति के 6 अन्य सदस्य
01 मूल कांग्रेसी
के.एम. मुंशी

प्रख्यात वकील एवं राजनीतिज्ञ; एकमात्र मूल कांग्रेसी सदस्य।

02 विधिक विशेषज्ञ
अल्लादि कृष्णास्वामी अय्यर

मद्रास के पूर्व एडवोकेट-जनरल और प्रतिष्ठित न्यायविद्।

03 प्रशासक
एन. गोपालस्वामी अय्यंगार

कश्मीर के पूर्व दीवान (प्रधानमंत्री) एवं कुशल प्रशासक।

04 मुस्लिम लीग
सैयद मोहम्मद सादुल्ला

असम के पूर्व प्रधानमंत्री (प्रीमियर) और लीग प्रतिनिधि।

05 प्रतिस्थापन
एन. माधव राव

बी.एल. मित्तर के अस्वस्थ होकर त्यागपत्र देने पर शामिल हुए।

06 प्रतिस्थापन
टी.टी. कृष्णामाचारी

1948 में डी.पी. खेतान की मृत्यु के पश्चात नियुक्त किए गए।

🎯
परीक्षा का पसंदीदा प्रश्न (Replacements Trap): बी.एल. मित्तर की जगह एन. माधव राव आए और डी.पी. खेतान की मृत्यु के बाद टी.टी. कृष्णामाचारी आए। कुल 7 सदस्य (1 अध्यक्ष + 6 सदस्य) थे।

5. संविधान को अंगीकृत करना एवं लागू होना

संविधान सभा में प्रारूप पर तीन विस्तृत वाचन (Readings) हुए:

  1. प्रथम वाचन (4 से 9 नवंबर 1948): सामान्य परिचर्चा।
  2. द्वितीय वाचन (15 नवंबर 1948 से 17 अक्टूबर 1949): खंडवार (धारावार) विचार; 7,635 संशोधन पेश हुए जिनमें से 2,473 पर वास्तविक बहस हुई।
  3. तृतीय वाचन (14 से 26 नवंबर 1949): डॉ. अम्बेडकर द्वारा संविधान पारित करने का प्रस्ताव पेश।

26 नवंबर 1949 को यह प्रस्ताव पारित हुआ और उपस्थित 284 सदस्यों ने इस पर हस्ताक्षर किए।

डॉ. बी.आर. अम्बेडकर संविधान सभा के अध्यक्ष डॉ. राजेन्द्र प्रसाद को संविधान का अंतिम प्रारूप सौंपते हुए (1949)
🏛️ ऐतिहासिक दस्तावेज

डॉ. बी.आर. अम्बेडकर संविधान का अंतिम प्रारूप डॉ. राजेन्द्र प्रसाद को सौंपते हुए (25 नवंबर 1949)

संविधान सभा द्वारा 26 नवंबर 1949 को भारतीय संविधान को विधिवत अंगीकृत किया गया। मूल संविधान में एक प्रस्तावना, 395 अनुच्छेद और 8 अनुसूचियां थीं।

🎯
परीक्षा में याद रखने योग्य तथ्य: 26 नवंबर 1949 को संविधान "अंगीकृत, अधिनियमित और आत्मार्पित" हुआ (संविधान दिवस)। 26 जनवरी 1950 को यह पूर्ण रूप से "लागू" हुआ (गणतंत्र दिवस)।
💡 बार-बार होने वाली गलतियाँ (Exam Trap) — अंगीकृत तिथि बनाम लागू होने की तिथि
  • अंगीकृत (Adopted) करने की तिथि: 26 नवंबर 1949। इस दिन नागरिकता, चुनाव, अंतरिम संसद तथा अस्थायी उपबंध (अनुच्छेद 5, 6, 7, 8, 9, 60, 324, 366, 367, 379, 380, 388, 391, 392 व 393) तुरंत प्रभाव से लागू हो गए।
  • पूर्णतः लागू (Commenced) होने की तिथि: 26 जनवरी 1950। संविधान के शेष अधिकांश उपबंध 26 जनवरी 1950 को लागू हुए, जिसे प्रतिवर्ष गणतंत्र दिवस के रूप में मनाया जाता है। ऐतिहासिक कारण: 26 जनवरी का दिन इसलिए चुना गया क्योंकि दिसंबर 1929 के लाहौर अधिवेशन में पारित 'पूर्ण स्वराज्य दिवस' सर्वप्रथम 26 जनवरी 1930 को मनाया गया था।
⚖️ प्रमुख ऐतिहासिक फैसला (Landmark Judgment) — संवैधानिक निरंतरता एवं अनुच्छेद 395

26 जनवरी 1950 को संविधान लागू होने के साथ ही अनुच्छेद 395 के तहत निम्नलिखित दो प्रमुख कानूनों को निरस्त (Repeal) कर दिया गया:

  1. भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम, 1947
  2. भारत सरकार अधिनियम, 1935 (समस्त संशोधनों सहित)

6. मास्टर सारांश तालिका: महत्वपूर्ण परीक्षा तथ्य

विषय / तत्व ऐतिहासिक तथ्य परीक्षा उपयोगिता
प्रतीक / मुहर (Seal) संविधान सभा की मुहर के रूप में हाथी (Elephant) को अपनाया गया परीक्षा में बार-बार पूछा गया प्रतीक
संवैधानिक सलाहकार सर बी.एन. राव (जिन्होंने संविधान का मूल प्रारंभिक प्रारूप तैयार किया) ये संविधान सभा के सदस्य नहीं थे
संविधान सभा के सचिव एच.वी.आर. अय्यंगार प्रशासनिक प्रमुख
मुख्य प्रारूपकार (Chief Draftsman) एस.एन. मुखर्जी जटिल विधिक भाषा के प्रारूपकार
सुलेखक (अंग्रेजी) प्रेम बिहारी नारायण रायजादा (प्रवाहपूर्ण इटैलिक शैली में हस्तलिखित) कोई पारिश्रमिक नहीं लिया, हर पृष्ठ पर नाम लिखा
सुलेखक (हिंदी) वसंत कृष्ण वैद्य हिंदी संस्करण का सुंदर सुलेखन किया
सौंदर्यीकरण व चित्रकारी ब्योहार राममनोहर सिन्हा एवं नंदलाल बोस (शांतिनिकेतन) प्रस्तावना और किनारों की चित्रकारी
राष्ट्रीय ध्वज 22 जुलाई 1947 को अपनाया गया (पिंगली वेंकैया द्वारा डिजाइन) स्वतंत्रता से पूर्व अपनाया गया
राष्ट्रगान एवं राष्ट्रगीत "जन-गण-मन" व "वंदे मातरम्" 24 जनवरी 1950 को अपनाए गए अंतिम बैठक के प्रमुख निर्णय
प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेन्द्र प्रसाद को 24 जनवरी 1950 को चुना गया संविधान सभा द्वारा निर्विरोध निर्वाचित
🎯

पिछले वर्षों के प्रश्न (PYQs) अभ्यास

UPSC, SSC एवं राज्य PSC परीक्षाओं में पूछे गए वास्तविक प्रश्न

UPSC CSE 2013 Q1 of 5

13 दिसंबर 1946 को संविधान सभा में ऐतिहासिक "उद्देश्य प्रस्ताव" निम्नलिखित में से किसके द्वारा प्रस्तुत किया गया था?

💡 Explanation / व्याख्या: Option B

जवाहरलाल नेहरू ने 13 दिसंबर 1946 को उद्देश्य प्रस्ताव पेश किया, जिसे 22 जनवरी 1947 को सर्वसम्मति से स्वीकार किया गया।

SSC CGL 2021 Q2 of 5

संविधान सभा का संवैधानिक सलाहकार किसे नियुक्त किया गया था?

💡 Explanation / व्याख्या: Option B

सर बी.एन. राव को संविधान सभा का संवैधानिक/विधिक सलाहकार नियुक्त किया गया था।

UPPSC 2020 Q3 of 5

संविधान सभा की प्रारूप समिति में बी.एल. मित्तर के अस्वस्थ होने के बाद उनके स्थान पर किसे सदस्य बनाया गया था?

💡 Explanation / व्याख्या: Option A

बी.एल. मित्तर के स्वास्थ्य कारणों से इस्तीफा देने पर एन. माधव राव को प्रारूप समिति में शामिल किया गया था। डी.पी. खेतान की मृत्यु के बाद टी.टी. कृष्णामाचारी आए थे।

BPSC 2019 Q4 of 5

कैबिनेट मिशन योजना (1946) द्वारा संविधान सभा में कुल कितनी सीटें आवंटित की गई थीं?

💡 Explanation / व्याख्या: Option B

कैबिनेट मिशन योजना के अनुसार संविधान सभा में कुल 389 सीटें थीं (296 ब्रिटिश भारत + 93 देसी रियासतें)। विभाजन के बाद यह संख्या घटकर 299 रह गई।

UPSC CSE 2018 Q5 of 5

भारत की संविधान सभा द्वारा किस पशु को आधिकारिक मुहर/प्रतीक के रूप में अपनाया गया था?

💡 Explanation / व्याख्या: Option C

हाथी (Elephant) को संविधान सभा के आधिकारिक प्रतीक और मुहर के रूप में स्वीकार किया गया था।